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दिल्ली ब्लास्ट में शामली का बेटा भी गया — नोमान की मौत से गांव में मातम, भाई के सामने टूटी ज़िंदगी; परिवार का रो-रोकर बुरा हाल, मीडिया की चुप्पी पर उठे सवाल

घर में मातम पसरा है, परिजन बदहवास हैं और गांव के लोग ग़मगीन माहौल में उसकी यादों को रो-रोकर बयां कर रहे हैं।

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💥 दिल्ली ब्लास्ट में शामली का बेटा भी गया — नोमान की मौत से गांव में मातम, भाई के सामने टूटी ज़िंदगी; परिवार का रो-रोकर बुरा हाल, मीडिया की चुप्पी पर उठे सवाल 🚨

नई दिल्ली / शामली।
दिल्ली के लाल क़िले के पास सोमवार शाम हुए भीषण ब्लास्ट ने पूरे देश को हिला दिया, लेकिन इस धमाके ने शामली जनपद के एक परिवार को बर्बाद कर दिया। इस धमाके में नोमान नामक युवक, निवासी शामली जनपद, की मौत हो गई है। नोमान अपने बड़े भाई के साथ कॉस्मेटिक का सामान लेने दिल्ली गया था, लेकिन शाम लौटते समय वह लाल क़िले के पास हुए धमाके की चपेट में आ गया। यह हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही नोमान की मौत हो गई जबकि उसका भाई गंभीर रूप से घायल हुआ है। अब शामली के इस युवा की मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। घर में मातम पसरा है, परिजन बदहवास हैं और गांव के लोग ग़मगीन माहौल में उसकी यादों को रो-रोकर बयां कर रहे हैं।

🕯️ घर में मातम और सन्नाटा

नोमान के घर में अब सिर्फ मातम है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, पिता को बेटे के शव को पहचानने की भी ताकत नहीं बची। परिजनों ने बताया कि नोमान बेहद मेहनती और शांत स्वभाव का लड़का था। वह अपने भाई के साथ कॉस्मेटिक का छोटा व्यापार शुरू करने की योजना बना रहा था। इसी सिलसिले में वह सोमवार को दिल्ली के चावड़ी बाजार गया था, जहाँ से शाम तक खरीदारी पूरी कर वह लौट रहा था। लेकिन जैसे ही लाल क़िले के पास उसकी कार ट्रैफिक सिग्नल पर पहुंची, तभी अचानक भीषण धमाका हुआ। आवाज़ इतनी तेज़ थी कि उसका भाई कुछ सेकंड के लिए बेहोश हो गया। जब होश आया तो नोमान खून से लथपथ पड़ा था — उसकी सांसें थम चुकी थीं।

🚑 अस्पताल में देर से पहुंची मदद

घटना के बाद घायलों को दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां अव्यवस्था का आलम देखने को मिला। परिजनों ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने देर रात तक किसी तरह की जानकारी नहीं दी। नोमान का शव अस्पताल की मॉर्चरी में रखा गया था, जहां परिवार को उसे पहचानने के लिए सुबह तक इंतजार करना पड़ा। सबसे पीड़ादायक बात यह रही कि शव को घर लाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई। परिवार को अपनी ही व्यवस्था से वाहन किराये पर लेकर दिल्ली से शामली तक शव लाना पड़ा।

💔 गांव में उमड़ा जनसैलाब

मंगलवार सुबह जब नोमान का पार्थिव शरीर उसके गांव पहुंचा, तो सैकड़ों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। हर किसी की आंखों में आंसू थे। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की त्रासदी है। “एक बेकसूर लड़का जिसने जिंदगी में कभी किसी का दिल नहीं दुखाया, वो आतंक की भेंट चढ़ गया,” गांव के लोगों ने कहा।

🧨 सरकार और मीडिया पर सवाल

स्थानीय लोगों में नाराज़गी है कि मीडिया ने इस घटना के मानवीय पहलू को नज़रअंदाज़ कर दिया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं कि “जब किसी वीआईपी को कुछ होता है तो देशभर में खबरें चलती हैं, लेकिन एक गरीब परिवार का बेटा आतंक की आग में झुलस जाए, तो किसी चैनल को TRP नहीं मिलती।” शामली के युवाओं ने प्रशासन से आर्थिक सहायता और न्याय की मांग की है।

🔍 जांच में शामिल एजेंसियाँ

इस बीच, दिल्ली पुलिस, एनआईए और आईबी की टीमें लाल क़िला ब्लास्ट की जांच में लगी हैं। CCTV फुटेज से यह सामने आया है कि धमाके वाली कार में तीन संदिग्ध व्यक्ति सवार थे, जिनमें से एक की पहचान डॉ. उमर मोहम्मद के रूप में की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी की आधिकारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है।

🕊️ एक मासूम की मौत का दर्द

नोमान की मौत ने न केवल उसके परिवार, बल्कि पूरे शामली को झकझोर दिया है। एक पिता की आंखों से बहते आंसू और मां की टूटी हुई आवाज़ देश के हर नागरिक से सवाल पूछ रही है — “क्या किसी मासूम की जान इतनी सस्ती है कि उसे सिर्फ आंकड़ों में गिना जाए?”

इस हादसे ने फिर साबित कर दिया कि आतंक की आग सिर्फ दिल्ली को नहीं, बल्कि देश के हर कोने को झुलसा रही है। सरकार से उम्मीद है कि इस केस की सच्चाई जल्द सामने आए और हर पीड़ित परिवार को न्याय मिले।


✍️ रिपोर्ट — एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
📍सहारनपुर | 📞 8217554083

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